छत्तीसगढ़रायगढ़

योजना एक पृथक्करण फिर स्वीकृत राशि अलग-अलग ,उस पर भी गुणवत्ता एवं निर्माण,कार्य का प्रकार अलग-अलग क्यों – (पद्मनाम प्रधान) सामाजिक कार्यकर्ता

                              पद्मनाम प्रधान

रायगढ़। पुसौर विकासखंड में ग्राम पंचायतों में बनाए गए पृथक्करण शेड निर्माण कार्य अब सवालों के घेरे में आ गया है। वर्ष 2024-25 में स्वीकृत इस योजना के तहत एक ही ब्लॉक की अलग-अलग पंचायतों में लागत, निर्माण तरीका और गुणवत्ता में बड़ा अंतर देखने को मिला है।

ग्राउंड निरीक्षण के दौरान ग्राम पंचायत तुरंगा, कोसमंदा और देवलसुरा में स्थिति अलग-अलग पाई गई। जबकि तीनों पंचायतों में कार्य एक ही उद्देश्य से स्वीकृत था, इसके बावजूद निर्माण में समानता नहीं दिखी।

लागत में अंतर

ग्राम पंचायत कोसमंदा – ₹4.10 लाख
ग्राम पंचायत तुरंगा – ₹3.70 लाख
ग्राम पंचायत देवलसुरा – ₹3.60 लाख

स्थानीय लोगों का कहना है कि अधिक राशि मिलने के बावजूद कहीं निर्माण कमजोर है, तो कहीं शेड अधूरा नजर आ रहा है। सूचना पट, फोटो और वीडियो में भी निर्माण गुणवत्ता में फर्क साफ दिखाई देता है।

निगरानी पर उठे सवाल

पृथक्करण शेड का निर्माण ग्राम पंचायतों द्वारा कराया गया है। वहीं, तकनीकी और प्रशासनिक निगरानी की जिम्मेदारी जनपद पंचायत के सीईओ, इंजीनियर, सचिव और सरपंचों पर थी। इसके बावजूद एक ही योजना में इतना अंतर सामने आना निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।

जांच की मांग

ग्रामीणों ने मामले की तकनीकी जांच और लागत-गुणवत्ता ऑडिट की मांग की है। उनका कहना है कि स्वच्छता जैसी महत्वपूर्ण योजना में भी यदि पारदर्शिता नहीं बरती गई, तो यह गंभीर विषय है।

फिलहाल इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों का पक्ष सामने नहीं आया है।

Saroj Shriwas

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