
,, रायगढ़,, आरटीओ अधिकारी अमित कश्यप के लगातार ,,उपेक्षा कारण के चलते ही क्षेत्र में बढ़ते क्रम पर हो रहा रोड एक्सीडेंट का मामला
रायगढ़@ छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में परिवहन विभाग की एक बड़ी लापरवाही और फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है, जो न केवल राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाता है, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं में वृद्धि का प्रमुख कारण भी बन रहा है। इस घोटाले में ओडिशा के निवासियों के फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस रायगढ़ में बनाए जा रहे थे, जिससे ओडिशा सरकार को भारी राजस्व हानि हो रही है। इस मामले में जिला परिवहन अधिकारी अमित कश्यप की भूमिका शक के घेरे में है, और स्थानीय लोग उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे फर्जी लाइसेंसों के कारण अनट्रेंड ड्राइवर सड़कों पर उतर रहे हैं, जो दुर्घटनाओं को बढ़ावा दे रहा है।
मामले की शुरुआत “दैनिक खबर सार” के एक खोजी रिपोर्ट से हुई, जिसमें खुलासा किया गया कि रायगढ़ में कुछ एजेंट ओडिशा के लोगों के लिए फर्जी तरीके से ड्राइविंग लाइसेंस जारी कर रहे थे। इन लाइसेंसों में न तो उचित ट्रायल लिया जा रहा था और न ही पुलिस वेरिफिकेशन किया जा रहा था। रिपोर्ट के मुताबिक, इन आवेदक कर्ताओं ने फर्जी दस्तावेजों और पते के आधार पर सैकड़ों लाइसेंस बने हैं, जो सीधे तौर पर सड़क सुरक्षा नियमों का उल्लंघन है। खबर प्रकाशित होने के बाद विभाग ने तुरंत कार्रवाई का दिखावा किया और कुछ एजेंटों की आईडी बंद कर दी। लेकिन अगले ही दिन, जब मीडिया ने इस मुद्दे को दोबारा उठाया, तो उन्हीं एजेंटों की आईडी चालू हो गई। यह घटनाक्रम इतना संदिग्ध था कि स्थानीय पत्रकारों ने इसे “मीडिया बाइट के बाद का जादू” करार दिया।
मामले में शामिल एक अधिकारी कौशल्या रात्रि ने मीडिया से बातचीत में कहा, “आईडी चालू या बंद करना हमारे हाथ में नहीं है, यह रायपुर से नियंत्रित होता है। बाकी का वरिष्ठ अधिकारी जानेंगे। हमें इसकी कोई जानकारी नहीं थी।” लेकिन उनके इस बयान पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि ठीक एक दिन बाद, यानी तीसरे दिन, उन्हीं एजेंटों को नोटिस जारी कर उनकी आईडी सस्पेंड कर दी गई। सवाल यह है कि अगर आईडी बंद करने की प्रक्रिया रायपुर से होती है, तो पहले बंद होने और फिर चालू होने का क्या रहस्य है? क्या यह मीडिया के दबाव में की गई दिखावटी कार्रवाई थी? या फिर विभाग के अंदर कोई बड़ा खेल चल रहा है? स्थानीय निवासियों और विपक्षी नेताओं का कहना है कि यह पूरी घटना परिवहन विभाग की मिलीभगत को दर्शाती है, जहां फर्जीवाड़ा छिपाने के लिए बार-बार नीतियां बदली जा रही हैं।
जिला परिवहन अधिकारी अमित कश्यप इस पूरे प्रकरण के केंद्र में हैं। सूत्रों के मुताबिक, जब से कश्यप ने पद संभाला है, तभी से फर्जी लाइसेंस बनाने के मामले बढ़े हैं।,”पिछले दो सालों में रायगढ़ में ड्राइविंग लाइसेंस बनाने की संख्या असामान्य रूप से बढ़ी है। अधिकांश आवेदक ओडिशा से हैं, जो बिना किसी वेरिफिकेशन के लाइसेंस प्राप्त कर रहे हैं। इससे ओडिशा सरकार को लाखों रुपये का राजस्व नुकसान हो रहा है, क्योंकि ये लोग अपने राज्य में लाइसेंस नहीं बनवा रहे।” कश्यप पर आरोप है कि वे इस फर्जीवाड़े को संरक्षण दे रहे हैं, और मीडिया से इस मामले को छिपाने की कोशिश कर रहे हैं। जब “दैनिक खबर सार” ने उनसे संपर्क करने की कोशिश की, तो उन्होंने कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। लेकिन सवाल उठ रहा है कि इतनी बड़ी कार्यवाही को मीडिया से छिपाना कितना जायज है? क्या कश्यप कोई बड़ा खेल खेल रहे हैं, जिसमें उच्चाधिकारियों की भी मिलीभगत है?

इस घोटाले का सीधा असर सड़क सुरक्षा पर पड़ रहा है। रायगढ़ जिले में पिछले दो सालों में सड़क दुर्घटनाओं में 30 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, और विशेषज्ञों का मानना है कि फर्जी लाइसेंस इसका प्रमुख कारण हैं। एक साजसेवज ने कहा, “फर्जी लाइसेंस वाले ड्राइवरों में ट्रेनिंग की कमी होती है, जिससे वे सड़क नियमों का पालन नहीं करते। परिणामस्वरूप, ओवरस्पीडिंग, गलत साइड ड्राइविंग और अन्य दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं। रायगढ़ जैसे ग्रामीण इलाकों में जहां सड़कें संकरी हैं, वहां यह समस्या और गंभीर है।” आंकड़ों के अनुसार, 2023 से 2025 तक जिले में 500 से अधिक दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 150 से ज्यादा मौतें हुईं। इनमें से कई मामलों में ड्राइवरों के लाइसेंस फर्जी पाए गए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए, स्थानीय संगठनों ने उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। स्थानीय शिकायत करता ने अपने शिकायत पर कहा, “यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि संगठित अपराध जैसा लगता है। पिछले दो सालों में बने सभी ड्राइविंग लाइसेंसों की जांच होनी चाहिए। ट्रायल की वीडियोग्राफी, पुलिस वेरिफिकेशन, स्थाई और अस्थाई पते की जांच जरूरी है। विशेष रूप से बाहरी राज्यों से आए आवेदकों की जांच हो, ताकि फर्जीवाड़ा उजागर हो सके।” विपक्षी दल कांग्रेस ने भी इस मुद्दे को विधानसभा में उठाने की बात कही है। उनके नेता, ने आरोप लगाया, “परिवहन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी ही दुर्घटनाओं के जिम्मेदार हैं। अगर आईडी चालू-बंद होने में गलती हुई है, तो रायपुर स्तर पर जांच होनी चाहिए। ओडिशा सरकार से भी संपर्क कर राजस्व हानि का हिसाब लिया जाए।”
सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन सूत्र बताते हैं कि रायपुर में उच्चाधिकारी इस मामले की समीक्षा कर रहे हैं। यदि जांच नहीं हुई, तो यह घोटाला और बड़ा रूप ले सकता है, और सड़क दुर्घटनाओं में और वृद्धि हो सकती है। जनता की मांग है कि पारदर्शिता बरती जाए और दोषियों को सजा दी जाए। रायगढ़ जैसे जिलों में जहां विकास की गति तेज है, वहां सड़क सुरक्षा को मजबूत करना जरूरी है। क्या अमित कश्यप और उनके विभाग पर कार्रवाई होगी, या यह मामला फाइलों में दब जाएगा? समय बताएगा, लेकिन फिलहाल यह घोटाला छत्तीसगढ़ की प्रशासनिक विश्वसनीयता पर बड़ा धब्बा है।





