
रायगढ़ । सामाजिक कार्यकर्ता पद्मनाभ प्रधान ने उड़ीसा के कालाहांडी और नियमगिरि क्षेत्र तथा छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के तमनार क्षेत्र में जल, जंगल, जमीन, पर्यावरण संरक्षण और आदिवासी अधिकारों के समर्थन में व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने की अपील की है।
जारी बयान में कहा गया है कि कालाहांडी, नियमगिरि और तमनार क्षेत्र के पहाड़, जंगल और नदियाँ केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं हैं, बल्कि स्थानीय आदिवासी एवं ग्रामीण समुदायों की संस्कृति, आस्था, आजीविका और पहचान का आधार हैं। इसलिए विकास से जुड़े किसी भी निर्णय में स्थानीय लोगों के अधिकारों, पर्यावरण संरक्षण तथा संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों का सम्मान सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

बयान में उड़ीसा और छत्तीसगढ़ में संचालित अथवा प्रस्तावित खनन एवं औद्योगिक परियोजनाओं के संदर्भ में अडानी, रिलायंस (अंबानी समूह), जिंदल, वेदांता, हिंडालको और शारदा एनर्जी जैसी कंपनियों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग से संबंधित सभी निर्णय पारदर्शी हों तथा स्थानीय समुदायों की भागीदारी और सहमति को प्राथमिकता दी जाए।
बयान में विशेष रूप से रायगढ़ जिले के तमनार क्षेत्र का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि यहां विभिन्न खनन एवं औद्योगिक परियोजनाओं के कारण जल, जंगल, जमीन, पर्यावरण और स्थानीय समुदायों की आजीविका से जुड़े मुद्दों पर भी व्यापक जनसंवाद और जन-जागरूकता की आवश्यकता है।

अभियान के अनुसार विकास का मॉडल ऐसा होना चाहिए, जिसमें जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा, आदिवासी अधिकारों का संरक्षण, पर्यावरण एवं जैव विविधता की रक्षा तथा संविधान और कानून के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित हो।
बयान में श्रमिक सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया गया है। इसमें कहा गया है कि औद्योगिक परियोजनाओं से जुड़ी किसी भी दुर्घटना, जिनमें छत्तीसगढ़ स्थित वेदांता के एक पावर प्लांट से संबंधित घटना का भी उल्लेख किया गया है, की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यदि जांच में किसी की लापरवाही सिद्ध होती है तो उसके विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
अभियान के अंत में लोगों से जल, जंगल, जमीन की रक्षा, आदिवासी अधिकारों के सम्मान, प्राकृतिक संसाधनों के न्यायपूर्ण उपयोग तथा लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करने की अपील की गई है।





