
गारे पेल्मा कोलफील्ड में भूमि दरों को लेकर हिनझर-जरडीही के ग्रामीणों ने उठाए सवाल, SECL व MDO अदानी कंपनी से मांगा जवाब
रायगढ़। तमनार, गारे पेल्मा कोलफील्ड क्षेत्र में भूमि दर एवं मुआवजा निर्धारण को लेकर हिनझर ग्राम पंचायत और आश्रित ग्राम जरडीही के ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे विकास और खनन परियोजनाओं के विरोध में नहीं हैं, लेकिन प्रभावित किसानों की जमीन का मूल्यांकन समान, पारदर्शी और न्यायपूर्ण तरीके से होना चाहिए।

ग्रामीणों के अनुसार, यदि एक ही क्षेत्र में आने वाली जमीनों के मूल्यांकन में अंतर किया जा रहा है, तो उसके स्पष्ट वैधानिक, राजस्व एवं वैज्ञानिक आधार की जानकारी किसानों को दी जानी चाहिए। ग्रामीणों का सवाल है कि उनकी जमीन से भी कोयला निकलेगा और उनकी आजीविका तथा आने वाली पीढ़ियों का भविष्य भी इसी जमीन से जुड़ा है, तो उनकी जमीन का मूल्य अन्य गांवों की तुलना में कम क्यों निर्धारित किया जा रहा है।
ड्रोन सर्वे को लेकर भी उठे सवाल
भूमि मूल्यांकन के साथ ग्रामीणों ने प्रभावित क्षेत्रों में किए जा रहे कथित ड्रोन सर्वे को लेकर भी जानकारी मांगी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि उनकी जमीन और खेतों का ड्रोन से सर्वे किया जा रहा है, तो उन्हें सर्वे का उद्देश्य, संबंधित एजेंसी अथवा कंपनी, अनुमति तथा सर्वे से प्राप्त जानकारी के उपयोग के बारे में स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए।
ग्रामीणों का कहना है कि भूमि मूल्यांकन, खनन योजना या अन्य किसी आधिकारिक प्रक्रिया के लिए ड्रोन सर्वे किया जा रहा है तो इसकी जानकारी प्रभावित किसानों को उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
ग्रामीणों का सवाल—भूमि दर तय करने का आधार क्या?
ग्रामीणों की ओर से अमरीका राठिया (सरपंच), अवराबत्ती कलंगा, सुशील धोबा, महादेव गुप्ता, योगेश गुप्ता, कुमार कलंगा, दीपक गुप्ता, टिकेश्वर गुप्ता, चंद्रशेखर कलंगा, शमारु कलंगा, नथू कलंगा, दुर्योधन गुप्ता, विलासिनी प्रधान, अमर साय यादव, तेजाराम गुप्ता, झनक कलंगा, भोग सिंह कलंगा सहित अन्य ग्रामीणों ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि जमीन की कीमत उसके नीचे मौजूद कोयले अथवा खनन उपयोगिता के आधार पर अलग-अलग निर्धारित की जा रही है, तो इसके नियम और आधार सार्वजनिक किए जाने चाहिए।

ग्रामीणों का कहना है कि “कोयला जमीन के नीचे है, लेकिन हमारी जिंदगी जमीन के ऊपर है।” खेती, मकान, रोजगार और परिवार का भविष्य जमीन से जुड़ा है। इसलिए केवल खनिज की उपलब्धता के आधार पर भूमि के मूल्यांकन को लेकर किसानों को स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए।
पद्मनाभ प्रधान ने भी उठाई पारदर्शिता की मांग
सामाजिक कार्यकर्ता पद्मनाभ प्रधान ने गारे पेल्मा कोलफील्ड क्षेत्र में गांववार भूमि दरों की तुलना सार्वजनिक करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि अलग-अलग गांवों में भूमि दर निर्धारित करने के अलग-अलग मापदंड हैं तो प्रशासन और संबंधित कंपनियों को उसका वैधानिक एवं वैज्ञानिक आधार किसानों के सामने रखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधन की कीमत अपनी जगह है, लेकिन किसान की जमीन उसके परिवार की आजीविका और भविष्य का आधार है। ऐसे में भूमि मूल्यांकन की प्रक्रिया में पारदर्शिता और प्रभावित किसानों की भागीदारी जरूरी है।
“हमें विवाद नहीं, स्पष्ट जवाब चाहिए”
ग्रामीणों का कहना है कि उनकी मांग किसी कंपनी या परियोजना के विरोध की नहीं है। वे केवल यह चाहते हैं कि भूमि मूल्यांकन और मुआवजा निर्धारण की प्रक्रिया नियमों के अनुरूप तथा पारदर्शी हो।
ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित विभागों से मांग की है कि हिनझर, जरडीही तथा आसपास के प्रभावित गांवों में निर्धारित भूमि दरों का आधार सार्वजनिक किया जाए और किसानों को बताया जाए कि किस नियम, राजस्व रिकॉर्ड एवं मूल्यांकन प्रक्रिया के आधार पर जमीन की कीमत तय की जा रही है।

अब ये सवाल बने चर्चा का विषय
गारे पेल्मा कोलफील्ड क्षेत्र में भूमि दर आखिर किस आधार पर तय की जा रही है? यदि गांववार दरों में अंतर है तो किस गांव में कितनी दर निर्धारित है और क्यों? इसके लिए कौन-सा नियम और राजस्व रिकॉर्ड आधार बनाया गया है? प्रभावित क्षेत्रों में ड्रोन सर्वे किस उद्देश्य से किया जा रहा है और क्या ग्रामीणों को इसकी जानकारी दी गई है?
हिनझर और जरडीही के ग्रामीण अब इन सवालों का जवाब जिला प्रशासन, राजस्व विभाग तथा संबंधित परियोजना एजेंसियों और कंपनियों से मांग रहे हैं।





